Wednesday, March 24, 2010

भगतसिंह को पाठ्यक्रम में लाना जरूरी - डॉ। अशोक सिंह

कोलकाता 24 मार्च भगतसिंह विचार मंच ने भगतसिंह ,सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर कल मंच कार्यालय में “ आज की परिस्थितिओं में भगतसिंह की सार्थकता” विषयक परिचर्चा का आयोजन किया जिसके माध्यम से भगतसिंह को आज की परिस्थितिओं में समझने का प्रयास किया गया कार्यक्रम में डॉ अशोक सिंह, केशव भट्टर, प.बं. राज्य विश्वविद्यालय(बारासात) की प्रेमचंद परिषद की संयुक्त संयोजक श्रेया जायसवाल, भगतसिंह विचार मंच की संयुक्त संयोजक शिक्षिका नीतु सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये डॉ अशोक सिंह ने कहा कि 1985 से पहले भगत सिंह पर अच्छी पुस्तकें नहीं थी प्रो. जगमोहन सिंह और प्रो. चमनलाल के प्रयासों से भगत सिंह पर अच्छा लेखन हुवा बंगाल से भगत सिंह का काफी अच्छा परिचय रहा, लेकिन अनुवाद के अभाव में यहाँ उन्हें ज्यादा लोग नहीं जान पाते भगतसिंह को पाठ्यक्रम में लाना जरूरी है मीडिया प्रभारी केशव भट्टर ने कहा कि भगतसिंह एक क्रन्तिकारी विचारक और भविष्यदृष्टा थे भाषा, शिक्षा, समाज, राजनीति और धर्म के अलावा तत्कालीन अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर उनका लेखन बेहद गंभीर और प्रभावशाली है भगतसिंह विचार मंच की संयुक्त संयोजक शिक्षिका नीतु सिंह ने कहा कि आज के बच्चों और युवाओं की प्राथमिकताएं बदल गयी हैं भगत सिंह को बच्चों और युवाओं तक पहुँचाने के लिए समयानुसार तरीके अपनाये जाने चाहिये सुरेन्द्रनाथ सांध्य कॉलेज के दिनेश कुमार शर्मा , श्री जैन विद्यालय के अंकित तिवारी, शिवम दुबे, पियूष कुमार गुप्ता, आकाश डागा, अनुपम दीक्षित और आतिश कुमार गुप्ता ने भी परिचर्चा में अपने विचार व्यक्त किये इस अवसर पर भगतसिंह विचार मंच द्वारा गत दिनों आयोजित “आज की परिस्थितिओं में भगतसिंह की सार्थकता” विषयक निबन्ध प्रतियोगिता में भाग लेने वालें विद्यार्थियों को प्रो. जगमोहन सिंह द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र दिए गए प्रो. अनय निर्णायक थे प्रतियोगिता में महानगर के सुरेन्द्रनाथ सांध्य कॉलेज, सावित्री पाठशाला, आदर्श बालिका विद्यालय और श्री जैन विद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया सुरेन्द्रनाथ सांध्य कॉलेज के दिनेश शर्मा ने पहला स्थान प्राप्त किया श्री जैन विद्यालय के अंकित तिवारी और विवेक राय ने क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया कार्यक्रम का संचालन भगतसिंह विचार मंच की संयुक्त संयोजक दिव्या प्रसाद ने किया

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